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1.3-ब्यूटेन डाइ अल

                                               

लुनोखोड 1

                                               

प्रवेशद्वार:विज्ञान/परिचय/1

                                               

प्रवेशद्वार:विज्ञान/विशेष चित्र/1

                                               

प्रवेशद्वार:फ़िल्म/जीवनी/1

सत्यजित राय: সত্যজিৎ রায়) एक भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे, जिन्हें 20वीं शताब्दी के सर्वोत्तम फ़िल्म निर्देशकों में गिना जाता है। इनका जन्म कला और साहित्य के जगत में जाने-माने कोलकाता के एक बंगाली परिवार में हुआ था। इनकी शिक्षा प्रेसिडेंसी कॉलेज और विश्व-भारती विश्वविद्यालय में हुई। इन्होने अपने कैरियर की शुरुआत पेशेवर चित्रकार की तरह की। फ़्रांसिसी फ़िल्म निर्देशक ज्यां रेनुआ से मिलने पर और लंदन में इतालवी फ़िल्म लाद्री दी बिसिक्लेत देखने के बाद फ़िल्म निर्देशन की ओर इनका रुझान हुआ। राय ने अपने जीवन में 37 फ़िल्मों का निर्देशन किया। इनकी पहली फ़िल्म पथेर पांचाली को कान फ़िल्मोत्सव में मिले" सर्वोत्तम मानवीय प्रलेख” पुरस्कार को मिलाकर कुल ग्यारह अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले। यह फ़िल्म अपराजितो और अपुर संसार के साथ इनकी प्रसिद्ध अपु त्रयी में शामिल है। वो पटकथा लिखना, अभिनेता ढूंढना, पार्श्व संगीत लिखना, चलचित्रण, कला निर्देशन, संपादन और प्रचार सामग्री की रचना करना। फ़िल्में बनाने के अतिरिक्त वे कहानीकार, प्रकाशक, चित्रकाऔर फ़िल्म आलोचक भी थे। राय को जीवन में कई पुरस्कार मिले जिनमें अकादमी मानद पुरस्काऔर भारत रत्न शामिल हैं।

                                               

प्रवेशद्वार:कर्नाटक/चयनित जीवनी /पुरालेख 1

श्रीमती मदुरै षण्मुखवडिवु सुब्बुलक्ष्मी कर्णाटक संगीत की मशहूर संगीतकार थीं। आप शास्तीय संगीत की दुनिया में एम. एस. अक्षरों से जानी जाती हैं। इन्हें १९९८ में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। श्रीमती सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को हुआ। आप ने छोटी आयु से संगीत का सिक्षण आरंभ किया, और दस साल की उम्र में ही अपना पहला डिस्क रेकौर्ड किया। इसके बाद आपने शेम्मंगुडी श्रीनिवास अय्यर से कर्णाटक संगीत में, तथा पंडित नारायणराव व्यास से हिंदुस्तानी संगीत में उच्च शिक्षा प्राप्त की। आपने सत्रह साल की आयु में चेन्नै की विख्यात म्यूज़िक अकैडेमी में संगीत कार्यक्रम पेश किया। इसके बाद आपने मलयालम से लेकर पंजाबी तक भारत की अनेक भाषाओं में गीत रेकौर्ड किये। श्रीमती सुब्बुलक्ष्मी ने कई फ़िल्मों में भी अभिनय किया। इनमें सबसे यादगार है 1945 के मीरा फ़िल्म में आपकी मुख्य भूमिका। यह फ़िल्म तमिल तथा हिन्दी में बनागई थी, और इसमें आपने कई प्रसिद्ध मीरा भजन गाए।

                                               

प्रवेशद्वार:फ़िल्म/सूची/1

रानी मुखर्जी एक भारतीय अभिनेत्री हैं जिन्हें बॉलीवुड फ़िल्मों में उनके अभिनय के लिए जाना जाता है। उन्होंने बांग्ला फ़िल्म बियर फूल से फ़िल्मी दुनिया में पदार्पण किया था। इस फ़िल्म का निर्देशन उनके पिता राम मुखर्जी ने किया था तथा रानी ने इस फ़िल्म में सहायक अभिनेत्री का अभिनय किया था। उनकी प्रमुख अभिनय भूमिका के रूप में १९९७ की नाटक फ़िल्म राजा की आयेगी बारात पहली फ़िल्म थी जिसमें उन्होंने बलात्कार की शिकार युवती का अभिनय किया। फ़िल्म आर्थिक रूप से पर असफल रही लेकिन उन्होंने स्टार स्क्रीन पुरस्कार समारोह में विशेष जूरी ट्राॅफी पुरस्कार जीता। सन् १९९८ में आमिर खान के साथ एक्शन फ़िल्म ग़ुलाम में अभिनय किया जिसने उन्हें एक नई पहचान दी। उसी वर्ष बाद में रानी मुखर्जी ने रूमानी नाटक फ़िल्म कुछ कुछ होता है में शाहरुख खान के रूमानी आकर्षण का अभिनय किया। इस फ़िल्म ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार दिलाया। उनकी इस पहली सफलता के बाद उन्होंने हास्य फ़िल्म हैलो ब्रदर, एक्शन थ्रिलर फ़िल्म बिच्छू और नाटक फ़िल्म नायक सहित विभिन्न फ़िल्मों में मुख्य अभिनेत्री का अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी उनके फ़िल्मी जीवन को आगे बढ़ाने में सहायक नहीं रही। कमल हासन की द्विभाषी फ़िल्म हे राम में उन्होंने सहायक अभिनेत्री की भूमिका निभाई थी जिससे उन्हें और अधिक ख्याति प्राप्त हुई। यह फ़िल्म उस वर्ष ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टियों में शामिल हुई थी।

                                               

प्रवेशद्वार:फ़िल्म/लेख/1

बर्फी! 2012 में प्रदर्शित रोमेंटिक हास्य-नाटक हिन्दी फ़िल्म है जिसके लेखक, निर्देशक व सह-निर्माता अनुराग बसु हैं। 1970 के दशक में घटित फ़िल्म की कहानी दार्जिलिंग के एक गूंगे और बहरे व्यक्ति मर्फी "बर्फी" जॉनसन के जीवन और उसके दो महिलाओं श्रुति और मंदबुद्धि के साथ सम्बन्धों को दर्शाती है। फ़िल्म में मुख्य भूमिका में रणबीर कपूर, प्रियंका चोपड़ा और इलियाना डीक्रूज़ हैं तथा सहायक अभिनय करने वाले सौरभ शुक्ला, आशीष विद्यार्थी, और रूपा गांगुली हैं। लगभग ₹ 30 करोड़ के बजट में बनी, बर्फी! विश्व स्तर पर 14 सितम्बर 2012 को व्यापक समीक्षकों की प्रशंसा के साथ प्रदर्शित हुई। समीक्षकों ने अभिनय, निर्देशन, पटकथा, छायांकन, संगीत और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के सकारात्मक चित्रण की प्रशंसा की। फ़िल्म को बॉक्स-ऑफिस पर बड़ी सफ़लता प्राप्त हुई, परिणामस्वरूप यह भारत और विदेशों में 2012 की उच्चतम अर्जक बॉलीवुड फ़िल्मों की श्रेणी में शामिल हुई। दुनिया भर में फ़िल्म ने रु. 175 करोड़ अर्जित किए। फ़िल्म को 85वें अकादमी पुरस्कारों की सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फ़िल्म श्रेणी के नामांकन के लिए भारतीय आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया।

                                               

प्रवेशद्वार:भूगोल/आज का देश/1

दक्षिण सूडान या अब-उस-सूडान, उत्तर-पूर्व में, अफ्रीका 3° और 13° समानांतर उत्तर का उपयोग और 24 डिग्री और 36 ° मध्याह्न पूर्व देशांतर पर स्थित एक स्थल-रुद्ध देश है । जुबा देश की वर्तमान राजधानी और सबसे बड़ा शहर भी है. देश के उत्तर में सूडान गणराज्य, पूर्वी इथियोपिया, दक्षिण-पूर्व में केन्या, दक्षिण पश्चिम युगांडा, दक्षिण-पश्चिम में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और पश्चिम में मध्य अफ्रीकी गणराज्य. इस उष्णकटिबंधीय जंगल, दलदलों और घास के मैदानों भागों एकदम सही है. यहाँ की प्रमुख नदी सफेद नील नदी, जो दक्षिण सूडान की राजधानी जुबा सहित देश के कई भागों के माध्यम से गुजरता है. यह अफ्रीका महाद्वीप के केंद्र में स्थित है और इसकी सीमा छह देशों में से एक के आसपास. यह प्राकृतिक तेल के मामले में अमीर देश. दक्षिण सूडान 9 जुलाई 2011 को जनमत-संग्रह के बाद स्वतंत्रता प्राप्त की. इस जनमत-संग्रह में कुल संख्या क्या यह 98.83%, देश में लोगों की सूडान, एक नए राष्ट्र के निर्माण के लिए डाल नहीं है. यह दुनिया के एक स्वतंत्र देश, संयुक्त राष्ट्र के एक सदस्य के रूप में और अफ्रीका, के रूप में देश.

ढाल
                                               

ढाल

जब कभी किसी सड़क में मोड़ आता है तो उस मोड़पर सड़क के फर्श को मोड़ के बाहरी ओर ऊँचा उठाकर सड़क को ढालू बनाया है। इसी प्रकार रेल के मार्ग में भी मोड़ बाहरी पटरी भीतरी से थोड़ी उँची रखी जाती है। सड़क की सतह का, या रेल के मार्ग का, मोड़ पर इस प्रकार ढालू बनाया जाना ढाल या आनति कहलाता है। मोड़ पर चलती हुई गाड़ी पर जो बल काम करते हैं वे ३ सड़क के फर्श की प्रतिक्रिया जो ऊपर की ओर काम करती है। २ गाड़ी का भार, जो ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कार्य करता है और १ अपकेंद्र बल सेंट्रिफ़ुगल फ़ोर्स जिसका बाहर की ओर क्षैतिज तथा त्रैज्य प्रभाव पड़ता है, अपकेंद्र बल का संतुलन सड़क की सतह का घर्षण करता है और यदि इस घर्षण का बल यथेष्ट न हो तो गाड़ी बाहर की ओर फिसल जाएगी। उठान इस फिसलने की प्रवृत्ति को रोकने में सहायता करती है। उठान का प्रयोग रेल के मार्गों पर दीर्घकाल से किया जा रहा है, किंतु जहाँ तक सड़कों का प्रश्न है, पहले गाड़ियों की मंद गति के कारण इसकी आवश्यकता नहीं पड़ती थी। आजकल मोटर गाड़ियों की तीव्र गति के कारण सड़क की उठान एक आधुनिक विकास है। आवश्यक ढाल उस महत्तम गति पर निर्भर रहती है जिसपर गाड़ियों के चलने की आशा की जाती है, अर्थात् उनके कल्पित वेग पर। ढाल निम्नलिखित सूत्र के अनुसार निश्चित की जाती है: q = V 2 / 15 r। यहाँ q = ढाल, V = अधिकतम कल्पित वेग मील प्रति घण्टा और r = मोड़ की त्रिज्या फुट में सही उठानवाली सड़क पर कल्पित गति से यात्रा करनेवाली गाड़ी सुगमता से तथा सुरक्षित ढंग पर, फिसलने की प्रवृत्ति के बिना, चलेगी। यदि कोई मोटरकार सड़क पर कल्पित गति से तेज चलेगी तो सड़क का घर्षण उसे फिसलने से बचाएगा। यदि कोई रेलगाड़ी कल्पित गति से तेज चलती है तो बगल की दाब को पहियों के बाहर निकले पार्श्व फ्लैंजेंज़ सँभाल लेते हैं। उठानवाला कोई भी मोड़ केवल उस गति से यात्रा करने के लिए सुखद होता है जिसके लिए सड़क बनाई जाती है। किंतु सड़क पर तो अनेक प्रकार की गाड़ियाँ, तीव्र तथा धीमी दोनों प्रकार की गतियों से चलती हैं। धीमी चाल से चलनेवाली गाड़ियों को, जैसे बैलगाड़ियों और अन्य जानवरों से खींची जानेवाली सवारियों को, जो कल्पित गति से कहीं कम गति पर चलती हैं, अधिक ढाल से असुविधा होती है। इस कारण भारत में भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुसार ढाल की सीमा १५ में १ अर्थात् १५ फुट चौड़ी में १ फुट नियत कर दी गई है। दूसरे देशों में यद्यपि १० में १ तक की ढाल की अनुमति होती है, तो भी साधारणत: ढाल १५ में १ से अधिक नहीं होती।

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